Sunday, May 20, 2012

शोगाक्को ...5

ऐसा दर्श्ये  देखा है आप ने ....
ये छोटे छोटे बच्चे अपनेआप  से स्कूल जाते हुए
अपने आप लाइन में चलते हैं
इन्हे स्कूल  कार पर नहीं छोड़ने जा सकते
और न ही कोई स्कूल बस आती है इन्हें लेने
साइकल  भी मना है
आंधी हो चाहे बर्फ गिरे या बारिश हो
ये इसी तरेह स्कूल जाते हैं और अपनी
  लाइन में ही चलते हैं ,सब बच्चे सुबह एक जगह इकट्ठे होते हैं और फिर लाइन में स्कूल के लिए चल
पड़ते हैं ,,कोई भी देर से नहीं आता ,न ही छुट्टी करता है ,बच्चे आपस में देखते हैं की सब आ गए तो चल पड़ते हैं
माँ बाप को चिंता की कोई जरुरत नहीं होती ...लंच भी स्कूल से मिलता है  और ट्यूशन का भी कोई झंझट नहीं
जो न आये वो अगले दिन टीचर  से समझ लो ,स्कूल की फीस भी नहीं होती ,बस लंच के थोड़े से पैसे और PTA के कुछ पैसे बस  ,लेकिन इस पर  भी माँ बाप बच्चे को स्कूल न भेजे तो उन्हें सीधा जेल है .....और सारा काम स्वयं  करने से बच्चे बचपन से ही आत्मनिर्भर बनते हैं ,
स्कूल में कूकिंग और सिलाई सिर्फ लड़कियों को नहीं लडको को भी सीखते हैं ,सब काम सब को बराबर सिखाया जाता है ,लड़के और लड़की की शिक्षा में कोई भेदभाव नहीं होता ,जो काम लड़के सीखते हैं वो लड़कियां  भी सीखती हैं और जो काम लड़कियां सीखती है वो लडको को भी सीखना पड़ता है .....तभी तो सोच एक जैसी होती है ।

2 comments:

  1. अरे वाह ! सब कुछ कितना व्यवस्थित ......जानकारी के लिए धन्यवाद .

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    1. धन्यवाद रीता जी..

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