Saturday, December 22, 2012

सर्दियाँ और स्कूल

बर्फ में खेलते बच्चे
सर्दियों में जब बड़े भी रजाइयों में दुबके होते हैं तब ये बच्चे  बहार बर्फ में खेलते स्कूल जाते हैं
बर्फ का मज़ा

सलाइड

इनकी ख़ुशी सर्दियों में और बड जाती है

कोई इन्हें लाख कहे

लेकिन ये स्कूल से छुट्टी नहीं करते

स्कूल में प्यार और मस्ती जो मिलती है करने को

Monday, September 24, 2012

स्कूल बैग

स्कूल बैग


Heavy bags are dangerous for kids in hindi नन्हे-नन्हे बच्चे और भारी-भारी बस्ते। सुबह और दोपहर के समय यह नजारा बेहद आम होता है। पीठ पर कापी-किताबों से लदे बैग से दबे इन बच्चे को देखकर अक्सर बोझा ढोने वाले मजदूरों की याद आ जाती है।

क्या आप जानते हैं कि यही बस्ते आपके बच्चे को जिंदगी भर के लिए बीमार बना सकते हैं। अमेरिकन फिजिकल थेरेपी एसोसिएशन ने चेतावनी दी है कि पीठ पर लदे इन बस्तों से बच्चों में पीठ का दर्द और मांसपेशियां खिंचने का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।

अध्ययन में पाया गया कि यदि बस्ते का वजन बच्चे के वजन से 10-15 फीसदी से ज्यादा है तो पीठ के दर्द होने का अंदेशा बढ़ जाता है। इतना ही नहीं आगे चलकर यह दर्द गंभीर रूप भी ले सकता है।
लेकिन यहाँ हर तरेह से बच्चों की सेहत का ख्याल रखा जाता है 
मेरा तो मानना है की प्राथमिक शिक्षा हर बच्चे की जापान जैसी हो 
क्योकि नींव मजबूत होगी तो इमारत भी बुलंद होगी ...

Sunday, August 26, 2012

स्कूल शुरू ,,,,,

स्कूल

लो जी हो गयी छुटियाँ खत्म

चलो स्कूल को ...

अब तो कोई बहा नहीं चलेगा 
ओह


फिर से पदाई

माँ की याद आती है

अब कहाँ खेलने का समये कहाँ

बस पडो पडो पडो 

उफ़

दिन रात की डाँट भी बंद अब तो

हर वक्त एक ही बात

पड़ लो पड़ लो

इससे तो स्कूल ही अच्छा है  

Tuesday, August 7, 2012

गर्मी की छुट्टियाँ

पूल

लो गर्मियां आ गयी जापान में भी
छुटिया शुरू

लेकिन बच्चो को छुट्टी कहाँ

अगर पदाई बंद तो पूल शुरू

छुट्टी का तो नाम ही मत लीजिए यहाँ
खुशी

कितने खुश हैं सब बच्चे

चलो पदाई से छुटकारा मिला

वैसे भी घर रहना कौन चाहता है 
पूल बैग

लेकिन आप पूल के कपडे किसी भी बैग में लेकर नहीं जा सकते
उसके लिए अलग बैग होता है ,उसमे गीला तोलिया जो रखना होता है और जाते वक्त सूखे और आते वक्त गीले कपडे
लेकिन पूल पर जाने से पहले याद से सुबह हर बच्चे को थर्मामीटर से अपने शरीर का तापमान लिखना होता है ,ताकि कोई बीमार बच्चा पूल में न जाये और दूसरे बच्चे भी बचे रहे
लो जी हो गयी छुटियों की शुरुआत
न माँ को छुट्टी न बच्चों को

Saturday, July 7, 2012

बरसात के जूते

जूते
बरसात आ गई तो बच्चे कौन से जूते डालें ये सब

तो वर्ष के शुरू में ही ले लिए जाते हैं

ये पिंक जूते लड़कियों के लिए और

बिलकुल इन जैसे काले रंग के

लडको के लिए

कीचड तो होता नहीं

लेकिन पानी से बचाव

और बच्चो की सेहत का पूरा ख्याल

स्कूल में और घर में

हर जगह रखा जाता है 

Thursday, May 31, 2012

शोगाक्को ...7 खाना बनाना

सब बच्चे मिल कर खाना बनाना सीख रहे हैं
लड़के और लड़की में कोई भेद भाव नहीं
एक निश्छल सी मुस्कान के साथ और फिर घर जा कर अपनी माँ की मदद भी करते हैं
बहुत प्यार और मेल जोल जो कहीं देखने को नहीं मिलता
आजकल अधिकतर माए  काम करती हैं इस लिए बच्चो की चिंता भी रहती है जो की स्वाभाविक भी है
लेकिन इन बच्चो को सब प्यार से सिखाया जाता है की
कैसे माँ को चिंता मुक्त करना है और खुद कैसे स्वादिष्ट खाना बना कर खाना है

Monday, May 21, 2012

Sunday, May 20, 2012

शोगाक्को ...5

ऐसा दर्श्ये  देखा है आप ने ....
ये छोटे छोटे बच्चे अपनेआप  से स्कूल जाते हुए
अपने आप लाइन में चलते हैं
इन्हे स्कूल  कार पर नहीं छोड़ने जा सकते
और न ही कोई स्कूल बस आती है इन्हें लेने
साइकल  भी मना है
आंधी हो चाहे बर्फ गिरे या बारिश हो
ये इसी तरेह स्कूल जाते हैं और अपनी
  लाइन में ही चलते हैं ,सब बच्चे सुबह एक जगह इकट्ठे होते हैं और फिर लाइन में स्कूल के लिए चल
पड़ते हैं ,,कोई भी देर से नहीं आता ,न ही छुट्टी करता है ,बच्चे आपस में देखते हैं की सब आ गए तो चल पड़ते हैं
माँ बाप को चिंता की कोई जरुरत नहीं होती ...लंच भी स्कूल से मिलता है  और ट्यूशन का भी कोई झंझट नहीं
जो न आये वो अगले दिन टीचर  से समझ लो ,स्कूल की फीस भी नहीं होती ,बस लंच के थोड़े से पैसे और PTA के कुछ पैसे बस  ,लेकिन इस पर  भी माँ बाप बच्चे को स्कूल न भेजे तो उन्हें सीधा जेल है .....और सारा काम स्वयं  करने से बच्चे बचपन से ही आत्मनिर्भर बनते हैं ,
स्कूल में कूकिंग और सिलाई सिर्फ लड़कियों को नहीं लडको को भी सीखते हैं ,सब काम सब को बराबर सिखाया जाता है ,लड़के और लड़की की शिक्षा में कोई भेदभाव नहीं होता ,जो काम लड़के सीखते हैं वो लड़कियां  भी सीखती हैं और जो काम लड़कियां सीखती है वो लडको को भी सीखना पड़ता है .....तभी तो सोच एक जैसी होती है ।

Saturday, May 19, 2012

शोगाक्को ....4..क्युशोकू

लंच 
















  क्या देखा ...
पाठशाला के बच्चे 
इकट्ठे 
खाना खाते हुए 
और 
कितनी सफाई से मिलता है खाना 
खाना खाने के बाद 
कक्षा को साफ़ भी करते हैं 
जल्दी जल्दी 
ताकि पदाई  न ख़राब हो 
और कक्षा भी साफ़ हो 
हर विद्यार्थी घर से ही सफाई का कपडा 
साथ लेकर जाता है 
सफाई के बाद 
सब अपने अपने कपडे को 
जल्दी से धो कर सूखने दाल देते हैं 
क्यों की 
छुट्टी के बाद भी तो कक्षा साफ़ करनी होती है 
अपने अपने कपडे पर  सब का 
नाम भी लिखा होता है
लड़ाई भी करते हैं ये 
लेकिन दोस्ती भी बहुत प्यारी करते हैं 
 


Thursday, May 17, 2012

शोगाक्को .....3

ये हैं शोगाक्को यानि प्राथमिक पाठशाला के बैग और टोपी
लडको के लिए कला बैग और लडकियों के लिए लाल बैग
स्कूल में वर्दी नहीं होती लेकिन बैग सिर्फ इसी रंग के ले कर जा सकते हैं और कोई नहीं । बैग के उपर आप कवर देख रहे हैं न ये धुप और बरसात से बैग को बचने के लिए है ,और खास बात की बैग हर साल नहीं ख़रीदा जाता ,एक बार ही लेते हैं क्योकि एक तो ये महंगा बहुत होता है दूसरा मजबूत भी बहुत होता है
     ये है टोपी पीले रंग की जो हर विद्यार्थी को पहननी होती है ,गोल टोपी लडकियों की और फलाप वाली लडको की ,इस टोपी पैर स्कूल का नाम लिखा होता है ,पहचान के लिए 

Wednesday, May 16, 2012

शोगाक्को ....परिचय

शोगाक्को कहते हैं जापान की प्राथमिक पाठशाला को ,इस की बिल्डिंग हर जगह लगभग एक सी होती है .और सब से बड़ी और अहम् बात ये स्कूल सरकारी होते हैं ,और चाहे कोई अमीर का बच्चा हो या गरीब का जायेगा इसी स्कूल में ,कोई भेद भाव नहीं है ,न ही प्राइवेट स्कूल ,जो कुछ अलग पढाना चाहे अपने बच्चे को तो स्कूल के बाद जिकु यानी स्कूल के बाद tution  भेज सकते हैं लेकिन वो भी रोज़ नहीं सप्ताह में 2 दिन ..
              हर देश में प्राथमिक शिक्षा 5 साल की होती है लेकिन जापान में 6 साल की है ,विद्यार्थी छट्टी पास कर के अपनी प्राथमिक शिक्षा पूर्ण करता है ,कोई भी माँ बाप बच्चे को स्कूल जाने से नहीं रोक सकते ये कानूनन जुर्म है और इसकी सजा में माँ बाप को ग्रिफ्तार भी किया जाता है .हर बचे के लिए 9 वी कक्षा तक शिक्षा अनिवार्य है ,इस शिक्षा  की सरकार कोई फीस नहीं लेती ,सब बच्चे एक सामान पड़ते  हैं,बच्चो को लंच स्कूल से ही मिलता है .....एक जैसा और पौष्टिक है
             6 वर्ष का बच्चा ही स्कूल में दाखिल करवा सकते हैं उससे छोटा नहीं ,छोटे बच्चो का अलग स्कूल होता है ,प्राथमिक पाठशाला का पूरी दुनिया में कोई मुकाबला नहीं है ,बच्चे खुद जिम्मेवारी से स्कूल जाते हैं ,और हाँ छुट्टी एक जैसी नहीं होती सब को ,जैसे प्रथम कक्षा को 1 बजे तक छुट्टी हो जाती है और कक्षा जैसे जैसे बड़ी होती जाती है पदाई के घंटे भी बड़ते जाते हैं ,हाँ सुबह पहुँचने का समय सब का एक होता है 7.30 से लेकर 8.00 बजे तक हर विद्यार्थी को पहुंचना होता है ..और फिर शुरू होता है इनका दैनिक कार्यक्रम
         आशा है आप को जान कर अच्छा लगा होगा ,समय समय पर  बहुत सी जानकारी आप को यहाँ मिलती रहेगी ,नमशकार .....कोनिचिवा 

Monday, May 14, 2012

शोगाक्को ....1

ये है जापान की पाठशाला और सामने एक खूब बड़ा सा मैदान ,हर स्कूल की बिल्डिंग लगभग एक सी ही होती है ,ये प्राथमिक पाठशाला है जहाँ का शोर स्कूल के बहार तो क्या मैदान में भी सुनाई नहीं पड़ता है ,है ना हैरानी की बात ,और सफाई की तो क्या कहने ,कोई सफाई करनेवाला नहीं होता पाठशाला में ,बच्चे मिल कर करते हैं सब ,स्कूल की छुट्टी होने के बाद अपनी कक्षा और स्कूल को साफ़ करना हर विद्यार्थी को सिखाया जाता है 

शोगाक्को....2

ये है जापान की पाठशाला जहाँ छोटे छोटे बच्चे बहुत प्यार से पद रहें हैं इनको स्कूल की वर्दी नहीं डालनी पड़ती कोई भी कपडे दाल कर जा सकते हैं ,हर बच्चे के लिए अलग बेंच होता है ।अध्यापक  से इनका रिश्ता एक दोस्त जैसा होता है  बायीं तरफ से सूरज की रौशनी आती है हर कमरे में और दाई तरफ दरवाज़ा होता है कक्षा का ,ये छोटे छोटे बच्चे घर में चाहे जो उधम मचाये लेकिन कक्षा में नहीं ,शरारत करते हैं तो अध्यापक इन्हें बड़े प्यार से समझा देता है ।